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मंगलवार, 23 सितंबर 2008

कुछ अपनी

मनके मै चंद्रहीरा देवांगन,शिक्षा-स्नातक ,रहवाशी -रायगढ.मुख्यपता-राजनांदगांव ,एक अदना मुलाजीम हुँ । पेपर वेट और घंटी की ट्रिंग-ट्रिंग से हेवी वेटेट दिन की शुरुवात होती है । गाँवो मे पला-बढा होने के कारण ग्रामीण जीवन से विशेष सरोकार है तथा यह मेरे कार्य का हिस्सा भी है यह बात मुझे कुछ सुकुन देती है । जन संपर्क अधिकारी होने के नाते जन तथा संपर्क दोनो के महत्व को भली-भाँती जानता हुँ।

कभी चित्र,कभी आकडो और कभी लेख,कभी ताजा समाचार के माध्यम से आपको रिझाने की कोशीश रहेगी ,निश्चीत ही आपके एप्रेसीयेसन लेटर से खुश हो जाउंगा किंतु यदि आप कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दे तो उस पर मुझे एतराज नही होगा !मैने अपनी विज्ञप्ती पढ दी है और अब आपके मेमो और सर्कुलर का इंतजार है॥


चंद्रहीरा देवांगन
बाँटो और राज करो एक अच्छी कहावत है,लेकिन एक होकर आगे बढो इससे भी अच्छी कहावत है-गोथे ।

मै हुँ कौन ?

मेरी फ़ोटो
दुर्ग के एक छोटे से गाँव मे जन्मा,गाँव की पुष्ट हवा मे पला-बढा। वर्तमान मे जन संपर्क अधिकरी के रुप मे मे । जन और संपर्क की भुमिका को सार्थक करने की कोशीश मे जुडा सरकारी तंत्र का एक अदना मुलाजीम ।

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